ऐतिहासिक इंडिया-यूएस ट्रेड डील: भारतीय बाजार में 'दिवाली', निवेशकों ने चंद घंटों में कमाए ₹20 लाख करोड़
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ऐतिहासिक इंडिया-यूएस ट्रेड डील: भारतीय बाजार में 'दिवाली', निवेशकों ने चंद घंटों में कमाए ₹20 लाख करोड़ — व्यापार / समाचारसेतु
भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील (Trade Deal) का आधिकारिक ऐलान हो गया है, जिसने भारतीय शेयर बाजार में सुनामी जैसी तेजी ला दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर हुई बातचीत के बाद इस समझौते पर मुहर लगाई। इसके साथ ही, अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय निर्यात पर लगने वाले भारी-भरकम टैरिफ को 50% से घटाकर सीधे 18% करने की घोषणा की है। इस ऐतिहासिक फैसले ने दलाल स्ट्रीट में उत्साह का ऐसा माहौल पैदा किया कि बाजार खुलते ही निवेशकों की संपत्ति में ₹20 लाख करोड़ का भारी उछाल देखने को मिला।
सेंसेक्स और निफ्टी में 'रॉकेट' जैसी रफ्तार, ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचा बाजार
जैसे ही बाजार खुला, बीएसई का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स (Sensex) लगभग 4,200 अंकों की छलांग लगाकर 85,800 के पार निकल गया। वहीं, निफ्टी (Nifty) ने भी करीब 5% की बढ़त के साथ 26,300 के स्तर को छुआ। बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि यह भारत की अब तक की सबसे बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक जीत है। पिछले कई महीनों से टैरिफ को लेकर बनी अनिश्चितता के बादल छंटते ही विदेशी निवेशकों (FIIs) ने भारतीय ब्लू-चिप शेयरों में जमकर खरीदारी की, जिससे चौतरफा तेजी दर्ज की गई।
निर्यात सेक्टर की चांदी: टेक्सटाइल और आईटी शेयरों में लगा 'अपर सर्किट'
इस ट्रेड डील का सबसे सकारात्मक असर निर्यात से जुड़े क्षेत्रों पर पड़ा है। टेक्सटाइल (Textiles), रत्न एवं आभूषण, और समुद्री उत्पादों (Seafood) जैसे लेबर-इंटेंसिव सेक्टर के शेयरों में 20% तक का उछाल देखा गया। किटेक्स गारमेंट्स, वेलस्पन लिविंग और केपीआर मिल जैसे शेयरों ने अपर सर्किट छुआ। जानकारों का कहना है कि अब भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में बांग्लादेश और वियतनाम की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे, जिससे भारतीय मैन्युफैक्चरिंग और 'मेक इन इंडिया' अभियान को नई ऊर्जा मिलेगी।
रूस से तेल और अमेरिकी टैरिफ: भारत की रणनीतिक जीत
इस डील की सबसे बड़ी बात यह है कि अमेरिका ने रूसी कच्चे तेल की खरीद पर लगे 'पैनल टैरिफ' को भी हटाने का संकेत दिया है। इसके बदले में भारत ने अमेरिका से ऊर्जा, तकनीक और कृषि उत्पादों के आयात को बढ़ाने पर सहमति जताई है। इस रणनीतिक संतुलन ने न केवल भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षा दी है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' को भी मजबूत किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे 'ऐतिहासिक आर्थिक मील का पत्थर' करार दिया है।