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एआई के युग में आईटी नौकरियों पर मंडराते बादल
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एआई के युग में आईटी नौकरियों पर मंडराते बादल — व्यापार / समाचारसेतु
भारतीय शेयर बाजार के आईटी सेक्टर में आज यानी 4 फरवरी 2026 को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब बाजार खुलते ही दिग्गज कंपनियों के शेयर ताश के पत्तों की तरह ढहने लगे। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस (Infosys) और विप्रो (Wipro) जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में 4% से 6.7% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई। इस अचानक आए 'क्रैश' ने निवेशकों के करीब ₹1.75 लाख करोड़ स्वाहा कर दिए हैं। बाजार में मची इस खलबली के पीछे अमेरिका के एक नए एआई (AI) टूल का हाथ बताया जा रहा है।
एंथ्रोपिक के 'क्लाउड कोवर्क' ने बढ़ाई टेंशन
इस भारी गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी एआई स्टार्टअप एंथ्रोपिक (Anthropic) द्वारा लॉन्च किया गया नया वर्कप्लेस प्रोडक्टिविटी टूल और इसके 'क्लाउड कोवर्क' (Claude Cowork) एजेंट के अपडेट्स हैं। यह एआई टूल अब कानूनी काम (Legal work), सेल्स, मार्केटिंग और जटिल डेटा एनालिसिस जैसे कार्यों को स्वायत्त रूप से करने में सक्षम है। निवेशकों को डर है कि यह तकनीक भारतीय आईटी कंपनियों के पारंपरिक बिजनेस मॉडल, जो मुख्य रूप से मैनपावर और सर्विस पर आधारित है, को सीधी चुनौती दे सकती है और उनके प्रॉफिट मार्जिन को कम कर सकती है।
टीसीएस और इंफोसिस के शेयरों में बड़ी सेंध
बाजार खुलते ही Infosys के शेयरों में 6% की गिरावट देखी गई, जिससे यह पिछले तीन महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। वहीं Wipro के शेयर 6.7% और HCL Tech करीब 4% तक टूट गए। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म 'जेफरीज' (Jefferies) द्वारा आईटी सेक्टर पर अपनी रेटिंग घटाने और वजन कम करने की रिपोर्ट ने इस आग में घी का काम किया है। वॉल स्ट्रीट पर भी माइक्रोसॉफ्ट और एनवीडिया जैसे टेक दिग्गजों में बिकवाली का दबाव देखा गया, जिसका सीधा असर दलाल स्ट्रीट पर पड़ा।
क्या भारतीय आईटी कंपनियों का भविष्य खतरे में है?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि एआई का बढ़ता दखल भारतीय आईटी कंपनियों के लिए एक 'वेक-अप कॉल' है। हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि TCS और इंफोसिस जैसी कंपनियां खुद एआई और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश कर रही हैं। आज की गिरावट को एक 'मार्केट करेक्शन' के रूप में भी देखा जा रहा है। सरकार ने भी हालिया बजट 2026 में एआई और सेमीकंडक्टर मिशन (ISM 2.0) पर जोर दिया है, जो भविष्य में इन कंपनियों को नई तकनीक के साथ तालमेल बिठाने में मदद कर सकता है।