आरएसएस के कार्यक्रम में सलमान खान की मौजूदगी पर मचा बवाल: एकनाथ शिंदे ने विरोधियों को दिया करारा जवाब
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आरएसएस के कार्यक्रम में सलमान खान की मौजूदगी पर मचा बवाल: एकनाथ शिंदे ने विरोधियों को दिया करारा जवाब — मनोरंजन / समाचारसेतु
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान ने हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक कार्यक्रम में शिरकत की, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। विपक्षी दलों द्वारा इस मुलाकात पर सवाल उठाए जाने और इसे 'राजनीतिक स्टंट' करार दिए जाने के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सलमान के बचाव में उतर आए हैं। शिंदे ने कड़े शब्दों में आलोचकों से पूछा कि क्या सलमान खान इस देश के नागरिक नहीं हैं जो वे ऐसे कार्यक्रमों में नहीं जा सकते?
विपक्ष ने साधा निशाना, एकनाथ शिंदे ने किया पलटवार
जैसे ही सलमान खान की संघ पदाधिकारियों के साथ तस्वीरें सामने आईं, सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे भाजपा और संघ की 'सॉफ्ट पावर' रणनीति का हिस्सा बताया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि सलमान खान एक वैश्विक स्तर के कलाकार हैं और वे किसी भी सामाजिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम में जाने के लिए स्वतंत्र हैं। शिंदे ने तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोगों को हर चीज में राजनीति देखने की बीमारी हो गई है।
राष्ट्रवाद और कला के संगम पर शिंदे ने विपक्ष को घेरा
एकनाथ शिंदे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, "सलमान खान भारतीय हैं और आरएसएस एक राष्ट्रवादी संगठन है। अगर एक भारतीय नागरिक अपने देश के किसी संगठन के कार्यक्रम में जाता है, तो इसमें पेट में दर्द क्यों होना चाहिए? क्या सलमान खान भारतीय नहीं हैं?" उन्होंने आगे कहा कि कलाकारों को सीमाओं में नहीं बांधना चाहिए और सलमान खान हमेशा से ही सामाजिक कार्यों और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए आगे रहे हैं। शिंदे के इस बयान ने विपक्षी खेमे को बैकफुट पर धकेल दिया है।
चुनावों से पहले बॉलीवुड और राजनीति की नजदीकियों के मायने
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले चुनावों से पहले फिल्मी सितारों का संघ या भाजपा के करीब आना एक बड़े बदलाव का संकेत है। सलमान खान से पहले भी कई बड़े सितारे संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात कर चुके हैं। हालांकि, सलमान खान की ओर से इस पर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन एकनाथ शिंदे के मुखर समर्थन ने इसे एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में यह विवाद शांत होता है या कोई नया मोड़ लेता है।