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समय रैना का छलका दर्द: 'हिटलिस्ट में था मेरे नाना का नाम', कश्मीरी पंडितों के पलायन की सुनाई खौफनाक दास्तां

Samay Raina hitlist kashmiri pandits Entertainment

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रिया सिन्हा स्टाफ संवाददाता
19 April 2026
1 मिनट पठन
समय रैना का छलका दर्द: 'हिटलिस्ट में था मेरे नाना का नाम', कश्मीरी पंडितों के पलायन की सुनाई खौफनाक दास्तां

समय रैना का छलका दर्द: 'हिटलिस्ट में था मेरे नाना का नाम', कश्मीरी पंडितों के पलायन की सुनाई खौफनाक दास्तां — मनोरंजन / समाचारसेतु

मशहूर कॉमेडियन और शतरंज प्रेमी समय रैना ने हाल ही में कश्मीरी पंडितों के पलायन और उस दौरान अपने परिवार द्वारा झेले गए डर पर खुलकर बात की है। समय, जो खुद एक कश्मीरी पंडित परिवार से ताल्लुक रखते हैं, ने एक पॉडकास्ट के दौरान साझा किया कि कैसे 90 के दशक में घाटी में फैले आतंक ने उनके बचपन और परिवार की खुशियों को छीन लिया था। उन्होंने बताया कि वह दौर सिर्फ एक पलायन नहीं, बल्कि एक गहरा मानसिक आघात था जिसे आज भी उनका परिवार पूरी तरह भुला नहीं पाया है।

हिटलिस्ट पर था परिवार का नाम

जब मौत के साये में गुजरती थी हर रात समय रैना ने खुलासा किया कि उनके नाना उस समय घाटी में एक सम्मानित पद पर थे और चरमपंथियों की 'हिटलिस्ट' में उनका नाम शामिल था। समय ने बताया, "मेरे नाना का नाम उस सूची में था जिन्हें निशाना बनाया जाना था। स्थिति इतनी भयावह थी कि घर के बाहर कौन खड़ा है या दरवाजे पर किसने दस्तक दी है, इससे भी रूह कांप जाती थी।" उन्होंने बताया कि कैसे उनके परिवार को रातों-रात अपना सब कुछ छोड़कर सिर्फ जान बचाने के लिए वहां से निकलना पड़ा। वह घर जिसे बनाने में जीवन भर की पूंजी लगी थी, वह एक पल में बेगाना हो गया।

पलायन का वो खौफनाक मंजर

टेंट में गुजरी रातें और संघर्ष का दौर घाटी छोड़ने के बाद का सफर और भी दर्दनाक था। समय ने याद किया कि कैसे उनके माता-पिता और बुजुर्गों को जम्मू के रिफ्यूजी कैंपों में चिलचिलाती धूप और गंदगी के बीच रहना पड़ा। उन्होंने कहा, "एक संपन्न परिवार जब अचानक सड़क पर आ जाता है और टेंट में रहने को मजबूर होता है, तो वह आत्मसम्मान पर गहरी चोट होती है।" समय के अनुसार, उस दौर की यादें आज भी उनके घर में चर्चा के दौरान आंखों में आंसू ला देती हैं। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर आंकड़ों की बात करते हैं, लेकिन उन भावनाओं को नहीं समझते जो एक उजड़े हुए घर के साथ जुड़ी होती हैं।

आज भी अधूरा है घर लौटने का सपना

कॉमेडी के पीछे छिपा गहरा सन्नाटा आज भले ही समय रैना देश के सबसे सफल स्टैंड-अप कॉमेडियन में से एक हैं, लेकिन वह कहते हैं कि उनकी हंसी के पीछे एक कश्मीरी पंडित का विस्थापन और दर्द हमेशा बना रहता है। उन्होंने सोशल मीडिया और इंटरव्यू के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की है कि कश्मीरी पंडितों के साथ जो हुआ, उसे भुलाया नहीं जाना चाहिए। समय ने अंत में भावुक होते हुए कहा कि वह आज भी उस दिन का इंतजार करते हैं जब वह बिना किसी डर के अपने पैतृक स्थान पर वापस जा सकेंगे और वह 'हिटलिस्ट' का डर हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।