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चीनी सेना ने बड़े पैमाने पर हवाई हमलों की योजना बनाने और उनमें तालमेल बिठाने के लिए AI सिस्टम पेश किया है।

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Translated by Riya Sinha स्टाफ संवाददाता
10 August 2026
1 मिनट पठन
चीनी सेना ने बड़े पैमाने पर हवाई हमलों की योजना बनाने और उनमें तालमेल बिठाने के लिए AI सिस्टम पेश किया है।

चीनी सेना ने बड़े पैमाने पर हवाई हमलों की योजना बनाने और उनमें तालमेल बिठाने के लिए AI सिस्टम पेश किया है। — विश्व / समाचारसेतु

सरकारी मीडिया के अनुसार, यह सपोर्ट सिस्टम ऐसे अभ्यास में मदद करने के लिए बनाया गया है जिनमें 'सैकड़ों टारगेट और दर्जनों फॉर्मेशन' शामिल होते हैं।

डॉक्यूमेंट्री में कहा गया है कि यह सिस्टम कई हमलों में तालमेल बिठा सकता है। सरकारी टीवी की एक डॉक्यूमेंट्री के अनुसार, चीनी वायु सेना 100 से ज़्यादा यूनिट्स वाले ऑपरेशन के लिए युद्ध की योजना बनाने में AI-आधारित सिस्टम का इस्तेमाल कर रही है।

रविवार को प्रसारित CCTV प्रोग्राम में बताया गया कि "इंटेलिजेंट स्ट्राइक प्लानिंग सिस्टम" को कमांडरों और पायलटों की मदद के लिए बनाया गया था। यह सिस्टम टारगेट को प्राथमिकता देने, हमलों के क्रम में तालमेल बिठाने और यूनिट्स को खास काम सौंपने में मदद करता है। साथ ही, यह भी बताया गया कि इसका इस्तेमाल "कई बार" किया जा चुका है।

AI के इस्तेमाल के बारे में मिली यह खास जानकारी बीजिंग की उन कोशिशों को दिखाती है जिनके ज़रिए वह नई टेक्नोलॉजी को पीपल्स लिबरेशन आर्मी के ऑपरेशन में शामिल कर रहा है और "सिस्टम-ऑफ-सिस्टम्स" वॉरफेयर (युद्ध की ऐसी रणनीति जिसमें कई प्लेटफॉर्म और हथियार सिस्टम को एक साथ इस्तेमाल किया जाता है) के कॉन्सेप्ट को बढ़ावा दे रहा है।  हवाई युद्ध प्रणाली को सीनियर कर्नल डेंग जियानपिंग की अगुवाई वाली एक टीम ने ट्रेनिंग एक्सरसाइज़ में मदद के लिए विकसित किया था। इन एक्सरसाइज़ में बड़े-बड़े फ़ॉर्मेशन और अलग-अलग तरह के एयरक्राफ़्ट शामिल होते रहे हैं।

डेंग ने CCTV की डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ 'झिशेंग' (जीत हासिल करना) में बताया कि "सैकड़ों टारगेट और दर्जनों फ़ॉर्मेशन" के तेज़ी से आगे बढ़ने के कारण, पारंपरिक कैलकुलेशन के तरीके उनका साथ नहीं दे पा रहे थे। यह डॉक्यूमेंट्री PLA की 99वीं सालगिरह मनाने के लिए प्रसारित की गई थी।

डेंग ने कहा, "सबसे मुश्किल काम कोड लिखना या मॉडल बनाना नहीं है। सबसे मुश्किल काम युद्धक्षेत्र की लॉजिक को अच्छी तरह समझना है। टारगेट, फ़ायरपावर, पेनेट्रेशन और नुकसान का आकलन – यानी पूरी स्ट्राइक चेन को समझना।"

उन्होंने आगे कहा कि अगर "लॉजिक में थोड़ी सी भी कमी" रह जाए, तो इससे जीत या हार का फ़र्क पड़ सकता है।

इस प्रोग्राम में एक सिस्टम टेस्ट का फ़ुटेज भी दिखाया गया। इसमें ज़मीनी कमांड सेंटर की एक बड़ी स्क्रीन पर दिखाया गया कि पायलटों के फ़ायर करने के आदेश के बाद अलग-अलग प्लेटफ़ॉर्म से छोड़ी गई मिसाइलों ने ज़मीन और समुद्र में मौजूद टारगेट पर हमला किया।

चीन का सबसे एडवांस्ड एयरक्राफ़्ट कैरियर, फ़ुजियान, सर्विस में शामिल हुआ।

डेंग ने कहा, "वायु सेना की एक बड़े पैमाने की एक्सरसाइज़ में, 100 से ज़्यादा टैक्टिकल यूनिट ने इस सिस्टम की प्लानिंग के आधार पर अपने हमलों में तालमेल बिठाया और बहुत ही सटीक टाइमिंग हासिल की। ​​सॉफ़्टवेयर को ही इक्विपमेंट, ऑपरेशन और युद्धक्षेत्र तय करने दें।"

गुरुवार को राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पोलितब्यूरो के एक स्टडी सेशन में कहा कि PLA को "बिना इंसानी पायलट वाले इंटेलिजेंट टेक्नोलॉजी के मिलिट्री इस्तेमाल को मज़बूत करना चाहिए, नेटवर्क इन्फॉर्मेशन सिस्टम के विकास और इस्तेमाल को बढ़ाना चाहिए, और धीरे-धीरे एक इंटेलिजेंट मिलिट्री सिस्टम बनाना चाहिए।"

PLA द्वारा AI के इस्तेमाल के बारे में पहले जो जानकारी सामने आई थी, उसमें ज़्यादातर ध्यान ड्रोन झुंड (ड्रोन स्वार्म) जैसे क्षेत्रों पर था, न कि उन सिस्टम पर जिन्हें इंसानी पायलटों वाले बड़े पैमाने के ऑपरेशन में मदद के लिए बनाया गया हो।

अमेरिका भी सेना के लिए AI सपोर्ट सिस्टम विकसित कर रहा है, लेकिन 'प्रोजेक्ट मेवेन' जैसे अमेरिकी प्रोग्राम चीनी प्रोग्राम से अलग हैं। वे युद्धक्षेत्र की स्थिति की जानकारी और इंटेलिजेंस एनालिसिस पर ज़्यादा ज़ोर देते हैं।

मिलिट्री एनालिस्ट झांग जुनशे ने सोमवार को 'ग्लोबल टाइम्स' को बताया कि AI युद्धक्षेत्र की गतिविधियों का रियल-टाइम में हिसाब लगाकर, अलग-अलग हथियारों को सबसे उपयुक्त टारगेट सौंपकर और यह तय करके कि हथियारों का इस्तेमाल कब किया जाना चाहिए, फ़ैसला लेने में मदद कर सकता है।

उन्होंने कहा कि इससे हमले की सटीकता भी बेहतर हो सकती है और संसाधनों की बर्बादी को रोकने में मदद मिल सकती है।  


Source - South China Morning Post 

Image Source - South China Morning Post