"अजित दादा की विरासत अब सुनेत्रा के हाथ: NCP की कमान संभालेंगी सुनेत्रा पवार, पार्टी ने तैयार किया 'पावर' प्लान!"
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"अजित दादा की विरासत अब सुनेत्रा के हाथ: NCP की कमान संभालेंगी सुनेत्रा पवार, पार्टी ने तैयार किया 'पावर' प्लान!" — राजनीति / समाचारसेतु
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में आए नेतृत्व के संकट को दूर करने के लिए पार्टी ने सुनेत्रा पवार को कमान सौंपने की तैयारी कर ली है। पार्टी के विभिन्न प्रकोष्ठों के 30 से अधिक पदाधिकारियों ने प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे को पत्र लिखकर आधिकारिक रूप से सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की मांग की है।
संगठन का कायाकल्प और 'पावर' वैक्यूम भरने की कोशिश
अजित पवार के निधन के बाद पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की थी। संगठन के नए ढांचे के तहत सुनेत्रा पवार न केवल सरकार में उपमुख्यमंत्री के रूप में प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालेंगी, बल्कि संगठन की सर्वोच्च पद (राष्ट्रीय अध्यक्ष) पर आसीन होकर पार्टी का चेहरा भी बनेंगी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि उन्हें पार्टी का नया 'आधारस्तंभ' माना जा रहा है ताकि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी की पकड़ कमजोर न पड़े।
प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे की भूमिका में बदलाव
संगठन के नए ढांचे में केवल अध्यक्ष पद ही नहीं, बल्कि कार्यकारी स्तर पर भी बदलाव तय किए गए हैं। प्रफुल्ल पटेल राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में दिल्ली और राष्ट्रीय राजनीति को संभालते रहेंगे, जबकि सुनील तटकरे महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का काम करेंगे। इस त्रिकोणीय नेतृत्व के जरिए पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि अजित दादा की विरासत अब सामूहिक और अनुभवी हाथों में सुरक्षित है।
विलय की चर्चाओं और भविष्य की चुनौतियों पर विराम
सुनेत्रा पवार की ताजपोशी के साथ ही शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) के साथ संभावित विलय की अटकलों पर भी फिलहाल विराम लगता दिख रहा है। हालांकि शरद पवार ने हाल ही में कहा था कि "किसी न किसी को तो नेतृत्व के लिए आगे आना ही होगा", लेकिन सुनेत्रा पवार को कमान सौंपने का फैसला यह स्पष्ट करता है कि अजित गुट अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखने के पक्ष में है। सुनेत्रा पवार को अब 6 महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना होगा, जो उनके राजनीतिक कौशल की पहली बड़ी परीक्षा होगी।