भारत-EU डील से पाकिस्तान में हड़कंप: 1 करोड़ नौकरियां और $9 अरब का निर्यात दांव पर
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भारत-EU डील से पाकिस्तान में हड़कंप: 1 करोड़ नौकरियां और $9 अरब का निर्यात दांव पर — विश्व / समाचारसेतु
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुई ऐतिहासिक 'मदर ऑफ ऑल डील्स' ने पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है। इस मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बाद पाकिस्तान के पूर्व वाणिज्य मंत्री गोहर एजाज ने चेतावनी दी है कि अब पाकिस्तान का यूरोपीय बाजार में 'जीरो-टैरिफ हनीमून' खत्म हो गया है। भारत को मिलने वाली व्यापारिक रियायतों के कारण पाकिस्तान के कपड़ा और परिधान उद्योग को सीधा खतरा पैदा हो गया है, जिससे देश में लगभग 1 करोड़ (10 मिलियन) नौकरियों के खत्म होने का डर सता रहा है।
'जीरो-टैरिफ हनीमून' खत्म: पाकिस्तान के लिए क्यों बढ़ी मुश्किल?
अब तक पाकिस्तान को GSP+ दर्जे के तहत यूरोपीय संघ में बिना किसी सीमा शुल्क के सामान निर्यात करने की सुविधा मिली हुई थी, जबकि भारतीय उत्पादों पर 12% तक का शुल्क लगता था। लेकिन इस नई डील के बाद भारत को भी 99% उत्पादों पर जीरो-टैरिफ या बहुत कम शुल्क की सुविधा मिल गई है। गोहर एजाज का कहना है कि अब भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता और कम कीमत के सामने पाकिस्तानी एक्सपोर्ट टिक नहीं पाएगा, जिससे $9 अरब का सालाना निर्यात खतरे में है।
टेक्सटाइल सेक्टर पर सबसे बड़ी मार: कंगाली की ओर बढ़ता इस्लामाबाद
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार उसका टेक्सटाइल सेक्टर है, जो कुल निर्यात का लगभग 60% हिस्सा कवर करता है। इस उद्योग में करोड़ों लोग काम करते हैं। भारत-EU डील के बाद यूरोपीय खरीदार अब भारतीय बाजार की ओर रुख कर रहे हैं, क्योंकि वहां सप्लाई चेन अधिक विश्वसनीय है। पाकिस्तानी विशेषज्ञों के अनुसार, बिजली की कमी और बढ़ते टैक्स के बीच उनके उद्योग पहले ही संघर्ष कर रहे थे, और अब भारत की इस 'आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक' ने उनकी कमर तोड़ दी है।
शहबाज सरकार में 'पैनिक मोड': सुधार या तबाही का विकल्प
इस संकट को देखते हुए पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार ने एक आपातकालीन अंतर-मंत्रालयी बैठक बुलाई है। पाकिस्तानी नेता मांग कर रहे हैं कि सरकार उद्योगों को क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली और गैस मुहैया कराए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान ने जल्द ही अपनी नीतियों में बड़ा बदलाव नहीं किया, तो उसके सबसे बड़े एक्सपोर्ट बाजार (EU) से उसकी हिस्सेदारी पूरी तरह खत्म हो सकती है, जो पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबे देश के लिए तबाही का सबब बनेगी।