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राजनीति

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन का अंत: युमनाम खेमचंद ने संभाली सत्ता

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रिया सिन्हा स्टाफ संवाददाता
5 February 2026
1 मिनट पठन
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन का अंत: युमनाम खेमचंद ने संभाली सत्ता

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन का अंत: युमनाम खेमचंद ने संभाली सत्ता — राजनीति / समाचारसेतु

मणिपुर में एक साल के लंबे अंतराल और राष्ट्रपति शासन के खात्मे के बाद नई सरकार का गठन हो गया है। 4 फरवरी, 2026 को युमनाम खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, जिसे राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली और शांति की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

समावेशी सरकार और समुदायों का प्रतिनिधित्व

मैतेई, कुकी और नागा का अनूठा गठबंधन खेमचंद की नई कैबिनेट में केवल राजनीतिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन साधने की भी कोशिश की गई है। मुख्यमंत्री के साथ दो उपमुख्यमंत्री बनाए गए हैं—कुकी समुदाय से नेमचा किपगेन और नागा समुदाय से लोसी दीखो। यह पहली बार है जब राज्य के तीनों प्रमुख समुदायों को शीर्ष नेतृत्व में एक साथ जगह दी गई है। शपथ ग्रहण के दौरान दो साल बाद पहली बार कुकी विधायक इंफाल पहुँचे, जो राज्य में बढ़ते आपसी विश्वास का संकेत है।

विकसित मणिपुर 2047 का विजन

शांति के साथ विकास की नई परिभाषा शपथ लेने के तुरंत बाद युमनाम खेमचंद ने प्रधानमंत्री मोदी के 'विकसित भारत 2047' के सपने को मणिपुर से जोड़ने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि मणिपुर की 36 विभिन्न समुदाय सदियों से एक साथ रहते आए हैं और अब वक्त आ गया है कि आपसी मतभेदों को भुलाकर राज्य को दोबारा प्रगति की राह पर लाया जाए। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि उनकी सरकार का मुख्य एजेंडा "समावेशिता" (Inclusiveness) होगा, जहाँ हर नागरिक खुद को सुरक्षित और गौरवान्वित महसूस करे।

विस्थापितों की घर वापसी और सुरक्षा का सवाल

राहत शिविरों से बाहर निकालने की बड़ी चुनौती खेमचंद के सामने सबसे बड़ी और तात्कालिक चुनौती उन 60,000 से अधिक लोगों का पुनर्वास करना है जो 2023 की हिंसा के बाद से अब भी राहत शिविरों में रह रहे हैं। नई सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में यह स्पष्ट किया कि हथियारों की बरामदगी और सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता होगी। सरकार का लक्ष्य 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले राज्य में पूर्ण सामान्य स्थिति बहाल करना है, ताकि विस्थापित अपने घरों को लौट सकें।