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सुप्रीम कोर्ट में 'दीदी' का कानूनी दांव: EC को घेरा तो खुद की वकालत पर ही उठने लगे सवाल!

Mamta Banerjee, Advocate, politics

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रिया सिन्हा स्टाफ संवाददाता
6 February 2026
1 मिनट पठन
सुप्रीम कोर्ट में 'दीदी' का कानूनी दांव: EC को घेरा तो खुद की वकालत पर ही उठने लगे सवाल!

सुप्रीम कोर्ट में 'दीदी' का कानूनी दांव: EC को घेरा तो खुद की वकालत पर ही उठने लगे सवाल! — राजनीति / समाचारसेतु

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर अपने पुराने तेवर में नजर आईं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने न केवल एक राजनेता, बल्कि एक 'एडवोकेट' की भूमिका निभाते हुए खुद अपनी दलीलें पेश कीं। उन्होंने चुनाव आयोग (ECI) पर तीखे हमले करते हुए उसे 'व्हाट्सएप कमीशन' तक कह डाला। ममता का आरोप है कि बंगाल में मतदाता सूची से जानबूझकर लाखों नाम हटाए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।

वकील की पोशाक और सुप्रीम कोर्ट में सीधी भिड़ंत

अदालत के भीतर ममता बनर्जी ने खुद मोर्चा संभाला और मुख्य न्यायाधीश के सामने दलील दी कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि शादी के बाद सरनेम बदलने वाली महिलाओं और काम के सिलसिले में पता बदलने वाले मजदूरों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। ममता ने इसे 'वोटबंदी' करार देते हुए कहा कि बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक नियमित संवैधानिक प्रक्रिया बताया।

डिग्री और पंजीकरण पर छिड़ा नया विवाद

जैसे ही ममता बनर्जी ने खुद को एक 'एडवोकेट' के रूप में पेश किया, सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उनकी योग्यता को लेकर सवाल उठने लगे। विरोधियों ने उनकी कानून की डिग्री और बार काउंसिल के पंजीकरण पर सवालिया निशान लगा दिए। विवाद तब और गहरा गया जब यह खबर आई कि पश्चिम बंगाल राज्य बार काउंसिल की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य समेत करीब 20,000 वकीलों के नाम गायब हैं।

खुद की सदस्यता पर सवाल: क्या है हकीकत?

ममता बनर्जी का नाम बार काउंसिल की सूची में न होने को लेकर भाजपा ने उन पर 'फर्जीवाड़ा' करने और अदालत को गुमराह करने के आरोप लगाए हैं। वहीं, तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कहना है कि यह तकनीकी खामी है और मुख्यमंत्री लंबे समय से बार काउंसिल की सदस्य रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि जो ममता बनर्जी चुनाव आयोग पर नाम काटने का आरोप लगा रही थीं, अब उन्हें अपनी ही 'वकील' वाली साख बचाने के लिए सफाई देनी पड़ रही है।