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चीन ने जापान के नए रक्षा श्वेत पत्र की आलोचना की।

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Translated by Riya Sinha स्टाफ संवाददाता
6 August 2026
1 मिनट पठन
चीन ने जापान के नए रक्षा श्वेत पत्र की आलोचना की।

चीन ने जापान के नए रक्षा श्वेत पत्र की आलोचना की। — विश्व / समाचारसेतु

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बुधवार को कहा कि चीन जापान के डिफेंस व्हाइट पेपर के नए वर्शन की निंदा करता है और उसे पूरी तरह से खारिज करता है। उन्होंने कहा कि चीन ने जापान के सामने इस मामले में कड़ी आपत्ति जताई है।

लिन ने कहा कि "जापान की सुरक्षा 2026" (The Defense of Japan 2026) व्हाइट पेपर में एक बार फिर बेबुनियाद आरोपों के साथ चीन को निशाना बनाया गया है। इसमें तथाकथित "चीन के खतरे" (China threat) वाली बात को दोहराया गया है और चीन के ताइवान क्षेत्र पर बेबाक टिप्पणियाँ करके चीन के आंतरिक मामलों में भारी दखल दिया गया है।

लिन ने ये बातें तब कहीं जब जापान के नए डिफेंस व्हाइट पेपर में चीन को "अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती" बताया गया और साथ ही रक्षा निवेश को जापान की अर्थव्यवस्था और समाज के लिए फायदेमंद बताया गया। जापान के आस-पास के इलाके में चीन की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए, व्हाइट पेपर में कहा गया है कि जापान को अपनी व्यापक राष्ट्रीय शक्ति के साथ-साथ अपने सहयोगी देशों, समान विचारधारा वाले देशों और अन्य के साथ मिलकर जवाब देना चाहिए।

इसके जवाब में लिन ने कहा कि चीन शांतिपूर्ण विकास और ऐसी राष्ट्रीय रक्षा नीति के लिए प्रतिबद्ध है जो स्वभाव से रक्षात्मक है। उन्होंने कहा कि जो सैन्य गतिविधियाँ की गईं, वे उचित और वैध थीं।

लिन ने ज़ोर देकर कहा, "ताइवान चीन के क्षेत्र का एक अभिन्न अंग है। ताइवान का मुद्दा पूरी तरह से चीन का आंतरिक मामला है। इसे कैसे सुलझाया जाए, यह चीन के लोगों का अपना मामला है और जापान को इसमें दखल देने का कोई अधिकार नहीं है।"

उन्होंने यह भी कहा कि डियाओयू दाओ (Diaoyu Dao) और उससे जुड़े द्वीप प्राचीन काल से ही चीन का हिस्सा रहे हैं। "जापान की तरफ से कुछ भी कहने या करने से यह सच्चाई कभी नहीं बदलेगी।"

लिन ने आगे कहा कि जापानी सैन्यवादियों ने एक समय एशिया और दुनिया को भारी दुख पहुँचाया था और अनगिनत अपराध किए थे। फिर भी, जापान न केवल उस इतिहास पर विचार करने में विफल रहा है, बल्कि अपने संविधान और अंतरराष्ट्रीय व घरेलू कानूनों का उल्लंघन करते हुए और युद्ध के बाद की अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को चुनौती देते हुए फिर से सैन्यीकरण (remilitarization) को तेज़ी से बढ़ा रहा है। यह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए एक गंभीर खतरा बन गया है।

लिन ने कहा, "नवीनतम व्हाइट पेपर में लंबी दूरी की आक्रामक क्षमताओं और युद्ध के नए तरीकों के विकास का गुणगान किया गया है, और यहाँ तक कि जापान के फिर से हथियारबंद होने (rearmament) को विकास का इंजन बताया गया है।" उन्होंने कहा कि इन सब बातों ने एक बार फिर "शांतिप्रिय देश" होने के जापान के दावे की सच्चाई को उजागर कर दिया है। प्रवक्ता ने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को पूरी तरह सतर्क रहना चाहिए और इसे रोकना चाहिए। हम जापान से आग्रह करते हैं कि वह ऐतिहासिक अपराधों के लिए गहरा पछतावा करे, इतिहास से सबक ले, अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए बहाने बनाना बंद करे और गलत रास्ते से पीछे हट जाए।"

Source - China Miltary 

Image Source -  CRI