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मलेशिया हज फंड घोटाला: पूर्व धार्मिक मामलों के मंत्री ने 211 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ट्रांसफर में अपनी भूमिका से इनकार किया।

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Translated by Riya Sinha स्टाफ संवाददाता
14 September 2026
1 मिनट पठन
मलेशिया हज फंड घोटाला: पूर्व धार्मिक मामलों के मंत्री ने 211 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ट्रांसफर में अपनी भूमिका से इनकार किया।

मलेशिया हज फंड घोटाला: पूर्व धार्मिक मामलों के मंत्री ने 211 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ट्रांसफर में अपनी भूमिका से इनकार किया। — विश्व / समाचारसेतु

मलेशिया के धार्मिक मामलों के पूर्व मंत्री ने सोमवार को तीन आरोपों में खुद को बेगुनाह बताया। ये आरोप देश के सरकारी हज बचत फंड और सऊदी प्रॉपर्टी ग्रुप के बीच 860 मिलियन रिंगित (US$211 मिलियन) से ज़्यादा के लेन-देन से जुड़े हैं।
65 साल के जमील खिर बहारोम ने 2009 से 2018 तक प्रधानमंत्री कार्यालय में धार्मिक मामलों के मंत्री के तौर पर काम किया। 2018 में पूर्व प्रधानमंत्री नजीब रज़ाक की सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी।
उन पर यह कानूनी कार्रवाई 'लेम्बागा तबुंग हाजी' (Lembaga Tabung Haji) के मैनेजमेंट और कामकाज की 2014 से 2020 के बीच हुई रॉयल कमीशन की जांच के बाद की गई है। जुलाई में सार्वजनिक की गई इस रिपोर्ट में 14 ऐसे निवेशों की पहचान की गई थी जिनमें समस्या थी।
मलेशिया के वित्त मंत्री अमीर हमज़ा अज़ीज़ान ने पिछले महीने संसद को बताया था कि इन निवेशों से कुल मिलाकर लगभग 13 बिलियन रिंगित का नुकसान हुआ है, और सात निवेश तो पूरी तरह से खत्म हो गए। चार्जशीट के मुताबिक, जमील पर आरोप है कि उन्होंने 'तबुंग हाजी' से रियल एस्टेट कंपनी 'अल-रावदा' को अप्रैल 2015 में 42.94 मिलियन रिंगित, दिसंबर 2016 में 288.17 मिलियन रिंगित और अगस्त 2017 में 529.19 मिलियन रिंगित ट्रांसफर करवाए। जमील खिर बहारोम ने कुआलालंपुर सेशंस कोर्ट के जज रोस्ली अहमद के सामने मुकदमा चलाने की मांग की। अभियोजन पक्ष ने 1 मिलियन रिंगित की ज़मानत राशि की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने ज़मानत राशि 300,000 रिंगित तय की और उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करने का आदेश दिया। हर आरोप पीनल कोड की धारा 403 के तहत लगाया गया था, जो संपत्ति के बेईमानी से गबन से संबंधित है। इसमें दोषी पाए जाने पर छह महीने की जेल और कोड़े मारने की सज़ा अनिवार्य है। दोषियों पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।



मलेशियाई एंटी-करप्शन कमीशन ने 1 सितंबर को जमील को हिरासत में लिया था। शुरू में उन्हें पांच दिन की रिमांड पर भेजा गया था, लेकिन जांच में सामने आए मामलों की आगे जांच के लिए उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई।
उनके वकील, हिशम तेह पोह तेइक ने कहा कि सरकारी वकीलों द्वारा सौंपे जाने वाले दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद बचाव पक्ष इन आरोपों को चुनौती देगा। हिशम ने अदालत में पत्रकारों से कहा, "सब देखेंगे कि उन पर धारा 403 के तहत आरोप सिर्फ इसलिए लगाए गए क्योंकि उन्होंने एक मंत्री के तौर पर अपने कर्तव्यों का पालन किया था।" "हम पूरी कोशिश के साथ उनका बचाव करेंगे। ईश्वर ने चाहा तो हम साबित कर देंगे कि वे दोषी नहीं हैं।"
कुआलालंपुर में मलेशिया के लेम्बागा तबुंग हाजी का मुख्यालय (बीच में)। 1963 में स्थापित तबुंग हाजी, सरकार के स्वामित्व वाला एक इस्लामिक वित्तीय संस्थान है। यह मलेशियाई मुसलमानों को मक्का की हज यात्रा – जो इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है – के लिए शरिया-अनुकूल प्रणाली में बचत करने की सुविधा देता है। यह निवेश और तीर्थयात्रा से जुड़े कामकाज का प्रबंधन भी करता है। जांच में पहचाने गए 14 संकटग्रस्त उपक्रमों में 'अल-रौदा' निवेश में सबसे अधिक नुकसान हुआ। तबुंग हाजी ने 2015 और 2017 के बीच मक्का और मदीना में चार होटलों की लंबी अवधि की लीज़ के लिए लगभग 1.55 बिलियन रिंगित का अग्रिम भुगतान किया था, ताकि तीर्थयात्रियों को वहां ठहराया जा सके। फंड ने बिना बैंक गारंटी और उचित जांच (ड्यू डिलिजेंस) पूरी किए बिना ही यह कदम उठाया; इसके बजाय, उन्होंने कंपनी के मालिक की व्यक्तिगत गारंटी वाले प्रॉमिसरी नोट्स पर भरोसा किया। अल-रौदा ने 2019 में किराया देना बंद कर दिया।


अमीर ने पिछले महीने संसद को बताया कि इस निवेश से 2024 तक 1.86 अरब रिंगित का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा, "इसे निवेश में खराब किस्मत कहकर नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता; यह साफ़ तौर पर कई चरणों में हुई विफलता है।" रिपोर्ट आने के बाद जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उनमें जमील भी शामिल हैं। 'ताबुंग हाजी' के पूर्व चेयरमैन और 'उमनो' (Umno) नेता अब्दुल अज़ीज़ अब्दुल रहीम ने पिछले हफ़्ते कंस्ट्रक्शन कंपनी 'पुत्राजया परदाना' में 193.5 मिलियन रिंगित के निवेश के मामले में अपने पद का गलत इस्तेमाल करने के आरोपों से इनकार किया। 'ताबुंग हाजी' से जुड़ी कंपनियों के दो पूर्व अधिकारियों पर भी लगभग 72,000 रिंगित के आपराधिक विश्वासघात (criminal breach of trust) का आरोप लगाया गया है, जबकि 'आलम मारितिम रिसोर्सेज' के प्रमुख अज़मी अहमद पर जहाज़ के चार्टर रेट से जुड़े धोखाधड़ी के दो आरोप हैं।

Source - South China Morning Post 

Image Source - South China Morning Post